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5 Best Poems of Munshi Premchand

Renowned Hindi poet Munshi Premchand was born in 1880 in a village called Lamhi near Varanasi. His early education took place in the village itself. He became a teacher in primary school after passing tenth. His poems (Munshi Premchand ki Kavita) are very famous.

Dhanpat Rai Srivastava, whom we all know today as Munshi Premchand, was born on 31 July 1880 in a small place called Lemhi which is located in Varanasi and he died on 8 October 1936.

He achieved many milestones in his 56 years of life, which is not a matter of a common man’s bus, he made a special place in Hindi and Urdu literature, the discussion of his poems is not limited only to the street and locality, Rather, his poems have also been included in the books of students.

Let us now read the famous works of Premchand...

(1)

ख्वाहिश नहीं मुझे,

मशहूर होने की,

आप मुझे पहचानते हो,

बस इतना ही काफी है,

अच्छे ने अच्छा,

और बुरे ने बुरा जाना मुझे,

क्योंकि जिसको जितनी जरूरत थी,

उसने उतना ही पहचाना मुझे,

जिंदगी की फलसफा भी,

कितनी अजीब है,

श्यामे कटती नहीं,

और साल गुजरते चले जा रहे हैं,

(2)

एक अजीब सी,

दौड़ है ये ज़िंदगी,

जीत जाओ तो कई,

अपने पीछे छूट जाते हैं,

और हार जाओ तो,

अपने ही पीछे छोड़ जाते हैं,

बैठ जाता हूं,

मिट्टी पर अक्सर,

क्योंकि मुझे अपनी,

औकात अच्छी लगती है||

(3)

ऐसी क्रांति,

जो सर्वव्यापक हो,

जो जीवन के,

मिथ्य आदर्शों का,

हूट सिद्धांतों और परीपाटियो का,

अनंत कर दे,

जो एक नए युग का प्रवतर्क हो,

एक नई सृष्टि खड़ी कर दें,

जो मनुष्य को,

धन और धर्म के,

आधार पर टिकने वाले,

राज्यों के पंजे से मुक्त कर दे|

(4)

मंदिर में दान खाकर,

चिड़िया मस्जिद में पानी पीती है,

सुनने में आता है राधा की चुनरीया,

कोई सलमा बेगम सीति है,

एक रफी साहब थे जो,

मैसेज रघुपति राघव राजा राम गाते थे,

और था एक प्रेमचंद जो बच्चों को,

ईदगाह सुनाता था,

कभी कन्हैया की लीला गाता,

रसखान सुनाई देता है,

बाकियों को दीखते होंगे हिंदू और मुसलमान,

मुझे तो हर जीव में भीतर एक भोला इंसान दीखता है|

(5)

मोहब्बत रूह की भूख है,

और सारी परेशानियां,

इस भूख के ना मिटने पर ही,

पैदा होती है,

एक कवी हमें,

मोह्हबत के हसीं पल,

और उसके परम आनंद का बता सकता है,

जो और भूख,

पैदा करता है,

और कवी के मीठे शब्दों से,

हमारी रूह जगमगा उठती है||